जॉब कार्ड में छोटी सी ग़लती भी बड़ी दिक़्क़त बन जाती है, क्योंकि मज़दूरी सीधे बैंक खाते में जाती है और वहाँ नाम का मिलान होता है। कार्ड पर रामप्रसाद लिखा हो और खाते में राम प्रसाद, तो भुगतान अटक सकता है।
अच्छी बात यह है कि सुधार का रास्ता छोटा है। यह काम ब्लॉक या ज़िले तक जाने का नहीं, ग्राम पंचायत में ही हो जाता है।
सुधार कहाँ होता है
आवेदन ग्राम पंचायत में दिया जाता है, और वहीं ग्राम रोज़गार सेवक या पंचायत सचिव उसे रिकॉर्ड में दर्ज करते हैं। पोर्टल पर बदलाव भी वहीं से होता है, इसलिए किसी बिचौलिए की ज़रूरत नहीं पड़ती।

लिखित आवेदन ही दीजिए, मौखिक कहकर मत छोड़िए, और रसीद लीजिए। यही काग़ज़ बाद में काम आता है अगर सुधार न हो और शिकायत करनी पड़े।
कौन सा दस्तावेज़ लगेगा
जो चीज़ ठीक करानी है, उसका सबूत लगता है। नाम की वर्तनी के लिए आधार, उम्र के लिए आधार या जन्म प्रमाण पत्र, और बैंक खाते के लिए पासबुक का पहला पन्ना।

सबसे साफ़ सलाह यह है कि जो नाम आधार में है, वही हर जगह रखिए। जॉब कार्ड, बैंक खाता और आधार, तीनों में एक जैसा नाम हो तो भुगतान की अड़चनें लगभग ख़त्म हो जाती हैं।
कितना समय लगता है
पंचायत के रिकॉर्ड में बदलाव कुछ दिन में हो जाता है, पर पोर्टल पर दिखने में कुछ और दिन लग सकते हैं, क्योंकि डेटा ब्लॉक स्तर से होकर जाता है।
दो हफ़्ते बाद भी पोर्टल पर पुराना ही दिखे, तो ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी से मिलिए। सूची पोर्टल पर कैसे देखी जाती है, यह नरेगा जॉब कार्ड लिस्ट कैसे देखें वाली पोस्ट में क़दम दर क़दम दिया है।
भुगतान पर असर
नाम या खाते की गड़बड़ी का असर सीधे पैसे पर पड़ता है। काम हो चुका हो और हाज़िरी दर्ज हो, फिर भी पैसा न आए, तो सबसे पहले यही जाँचिए कि खाता संख्या और नाम सही दर्ज हैं या नहीं।
बीच में खाता बंद हो गया हो या बैंक बदल गया हो, तो नया विवरण देना पड़ता है। रुका हुआ भुगतान सुधार के बाद दोबारा भेजा जाता है, इसलिए वह पैसा डूबता नहीं, बस देर से आता है।
उम्र ग़लत होने का अलग असर
उम्र सिर्फ़ जानकारी नहीं है। जॉब कार्ड वयस्क सदस्यों के लिए बनता है, इसलिए उम्र कम दर्ज हो जाने पर वह सदस्य काम माँगने के योग्य नहीं दिखेगा।
उल्टा भी होता है। उम्र बहुत ज़्यादा दर्ज हो जाए तो कुछ योजनाओं में नाम अपने आप बाहर हो जाता है। दोनों ही हालत में सुधार जल्दी करा लेना ठीक रहता है।
सुधार न हो तो कहाँ जाएँ
क्रम तय है और उसे क्रम से ही चलना चाहिए। पहले ग्राम रोज़गार सेवक और पंचायत सचिव, फिर ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी, और उसके बाद ज़िला कार्यक्रम समन्वयक।
हर चरण पर लिखित आवेदन और रसीद रखिए। अपने राज्य का नरेगा पन्ना नरेगा जॉब कार्ड वाले हिस्से से खुलता है, जहाँ राज्यवार link और ब्यौरा दिया है।
सामाजिक अंकेक्षण में भी उठाया जा सकता है
गाँव में होने वाले सामाजिक अंकेक्षण में रिकॉर्ड सबके सामने पढ़ा जाता है। अगर आपका नाम या ब्यौरा ग़लत दर्ज है, तो यह उसे दर्ज कराने का सबसे सीधा मौक़ा है।
वहाँ उठाई गई बात कार्रवाई रिपोर्ट में लिखी जाती है, इसलिए उसका पीछा करना आसान रहता है। बैठक की तारीख़ पंचायत में पहले से चिपकाई जाती है।
जॉब कार्ड में क्या-क्या दर्ज होता है
कार्ड पर परिवार के सभी वयस्क सदस्यों के नाम, उनकी उम्र, परिवार के मुखिया का नाम, गाँव और पंचायत, और बैंक या डाकघर के खाते का विवरण रहता है। साथ ही काम के दिन और मिली मज़दूरी भी दर्ज होती जाती है।
इनमें से किसी भी चीज़ की ग़लती सुधारी जा सकती है, और सुधार की जगह एक ही है। यह जान लेना इसलिए ज़रूरी है कि लोग अक्सर बैंक की ग़लती लेकर बैंक जाते हैं और पंचायत का काम बैंक में कराने की कोशिश करते रहते हैं।
बैंक खाते की गड़बड़ी सबसे महँगी है
नाम की वर्तनी में फ़र्क़ हो तो भुगतान लौट आता है, और लौटा हुआ भुगतान अपने आप दोबारा नहीं भेजा जाता। उसे फिर से भेजने के लिए सही विवरण दर्ज कराना पड़ता है।
खाता लंबे समय से इस्तेमाल न हुआ हो तो वह निष्क्रिय हो जाता है, और उसमें पैसा नहीं आता। मनरेगा का पैसा जिस खाते में आता है, उसे चालू रखना इसीलिए ज़रूरी है, भले ही उसमें और कोई लेन-देन न हो।
आधार से जुड़ाव अलग चीज़ है
कई राज्यों में मज़दूरी आधार से जुड़े खाते में भेजी जाती है। इसमें पैसा खाता संख्या से नहीं, आधार संख्या से जुड़े खाते में जाता है, और वह वही खाता होता है जिसे बैंक ने आख़िरी बार आधार से जोड़ा हो।
अगर किसी के दो बैंक खाते हैं और आधार दूसरे से जुड़ा है, तो पैसा उसी दूसरे खाते में चला जाएगा, चाहे जॉब कार्ड पर पहला लिखा हो। पैसा गुम नहीं होता, पर ढूँढ़ने में समय लगता है।
मुखिया बदलना पड़े तो
परिवार के मुखिया के गुज़र जाने पर कार्ड बेकार नहीं होता, उसमें मुखिया बदला जाता है। इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और नए मुखिया का आधार लगता है।
यह काम भी ग्राम पंचायत में ही होता है। इसे टालने पर काम तो मिलता रहता है, पर भुगतान में अड़चन आने लगती है क्योंकि खाता पुराने मुखिया के नाम रहता है।
नया सदस्य जोड़ना
परिवार का कोई सदस्य वयस्क हो जाए तो उसका नाम जॉब कार्ड में जोड़ा जा सकता है, और उसके बाद वह भी काम माँगने का हक़दार हो जाता है। आवेदन वही है, दस्तावेज़ में आधार और बैंक पासबुक लगती है।
ध्यान रहे कि सौ दिन की सीमा पूरे परिवार की होती है, सदस्य की नहीं। नाम जोड़ने से काम माँगने वाले बढ़ते हैं, कोटा नहीं। काम न मिलने पर भत्ते का दावा कैसे बनता है, यह ग्राम पंचायत के स्तर पर ही यह पूरा हिसाब रखा जाता है।
पंचायत का नाम ही ग़लत हो तो
कभी-कभी ग़लती व्यक्ति में नहीं, जगह में होती है। पोर्टल पर पंचायत का नाम अलग वर्तनी में दर्ज है, या गाँव किसी और पंचायत के नीचे दिखाया गया है।
ऐसे में ब्लॉक कार्यालय से पूछना पड़ता है कि पंचायत किस नाम से दर्ज है, क्योंकि यह पूरे गाँव पर लागू होता है और अकेले आपके कार्ड की बात नहीं रहती। अपनी तहसील के गाँवों की सूची तहसील के सारे गाँव वाली पोस्ट के तरीक़े से देखी जा सकती है।
सुधार के बाद सूची में जाँचिए
पंचायत में बदलाव दर्ज हो जाने का मतलब यह नहीं कि पोर्टल पर भी चढ़ गया। डेटा ब्लॉक स्तर से होकर जाता है, इसलिए दोनों में कुछ दिन का अंतर रहता है।
सही तरीक़ा यह है कि एक हफ़्ते बाद पोर्टल पर अपनी पंचायत की सूची खोलकर अपना नाम देखिए। वहाँ सुधरा हुआ नाम दिखे, तभी मानिए कि काम पूरा हुआ।
अगर सूची में नाम ही न मिले, तो पहले वित्तीय वर्ष जाँचिए, क्योंकि सूची हर साल अलग बनती है। गाँव और पंचायत का सही नाम पक्का करना हो तो राज्यों की सूची से ज़िला और तहसील खोलकर मिलान किया जा सकता है।
कार्ड खो जाए तो
जॉब कार्ड गुम हो जाना सुधार से अलग मामला है, पर रास्ता वही है। ग्राम पंचायत में आवेदन देकर दूसरी प्रति ली जा सकती है, और उसके लिए कोई शुल्क नहीं है।
पोर्टल पर आपका पूरा रिकॉर्ड मौजूद रहता है, इसलिए कार्ड खोने से काम के दिन या बक़ाया मज़दूरी नहीं डूबती। नया कार्ड उसी रिकॉर्ड से छापकर दिया जाता है और पुराना विवरण उसी में रहता है।
FAQs
ग्राम पंचायत में। ग्राम रोज़गार सेवक या पंचायत सचिव आवेदन लेकर रिकॉर्ड और पोर्टल दोनों में बदलाव करते हैं। ब्लॉक या ज़िले तक जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
जो ठीक कराना है उसका प्रमाण। नाम की वर्तनी के लिए आधार, उम्र के लिए आधार या जन्म प्रमाण पत्र, और बैंक खाते के लिए पासबुक का पहला पन्ना।
मज़दूरी सीधे बैंक खाते में जाती है और वहाँ नाम का मिलान होता है। जॉब कार्ड और खाते में नाम अलग हो तो भुगतान लौट आता है और दोबारा अपने आप नहीं भेजा जाता।
पंचायत के रिकॉर्ड में कुछ दिन, पर पोर्टल पर दिखने में कुछ और दिन लग सकते हैं क्योंकि डेटा ब्लॉक स्तर से होकर जाता है। दो हफ़्ते बाद भी पुराना दिखे तो ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी से मिलिए।