ज़मीन का काम हो, कोई सरकारी आवेदन हो, या बस यह जानना हो कि अपनी तहसील में कितने गाँव हैं, इसकी सूची देखने का तरीक़ा एक ही है। पूरी तहसील के गाँव एक साथ, आबादी और पिन कोड के साथ, बिना किसी login के।

चार क़दम

क्रम ऊपर से नीचे चलता है और बीच का कोई क़दम छोड़ा नहीं जा सकता, क्योंकि हर सूची पिछली पसंद पर बनती है।

अपनी तहसील के सारे गाँव कैसे देखें

चौथे क़दम पर सूची लंबी हो सकती है। बड़ी तहसीलों में एक हज़ार से ज़्यादा गाँव होते हैं, इसलिए सूची कई पन्नों में बँटी रहती है। शुरुआत राज्यों की सूची से कीजिए।

सूची में हर गाँव के आगे उसका पिन कोड भी रहता है। अगर आपको सिर्फ़ वही चाहिए तो गाँव का पिन कोड कैसे पता करें वाली पोस्ट छोटा रास्ता बताती है।

तहसील कहीं ब्लॉक है, कहीं मंडल

यह वही जगह है जहाँ ज़्यादातर लोग अटकते हैं। जिस इकाई को जनगणना तहसील कहती है, उसे अलग-अलग राज्यों में अलग नाम से जाना जाता है, और सरकारी पोर्टल अक्सर अंग्रेज़ी वाला नाम ही दिखाते हैं।

बिहार और झारखंड में प्रखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनपद पंचायत, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मंडल, गुजरात में तालुका, कर्नाटक में तालुक, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विकास खंड या क्षेत्र पंचायत। तहसील का मतलब एक बार साफ़ हो जाए तो यह सारी शब्दावली आसान लगने लगती है।

किस राज्य में कितनी तहसीलें

तहसीलों की संख्या राज्य के आकार से नहीं जुड़ी। वह इस बात पर निर्भर करती है कि राज्य ने प्रशासन को कितने टुकड़ों में बाँटा है।

अपनी तहसील के सारे गाँव कैसे देखें

पूरे देश की गिनती भारत में कुल कितने गाँव हैं वाली पोस्ट में है। आंध्र प्रदेश में सबसे ज़्यादा तहसीलें हैं क्योंकि वहाँ मंडल व्यवस्था में इकाइयाँ छोटी रखी गई हैं। उत्तर प्रदेश में गाँव सबसे ज़्यादा हैं पर तहसीलें उससे बहुत कम, यानी वहाँ एक तहसील के नीचे औसतन कहीं ज़्यादा गाँव आते हैं।

सूची में गाँव न मिले तो

तीन वजहें हो सकती हैं। पहली, गाँव किसी और तहसील में दर्ज है, क्योंकि प्रशासनिक सीमाएँ बोलचाल की सीमाओं से मेल नहीं खातीं। दूसरी, नाम की वर्तनी अलग है। तीसरी, वह एक बस्ती या मजरा है, अलग राजस्व गाँव नहीं।

तीसरी वजह सबसे आम है और सबसे कम समझी जाती है। जनगणना जिसे गाँव गिनती है वह ज़मीन की एक इकाई है, और उसके भीतर की छोटी बस्तियाँ अलग से दर्ज नहीं होतीं। राजस्व गाँव वाला पन्ना इस अंतर को विस्तार से समझाता है।

तहसील और ब्लॉक एक ही चीज़ नहीं हैं

यह फ़र्क़ बारीक है पर काम का है। तहसील राजस्व की इकाई है, जहाँ ज़मीन का रिकॉर्ड, लगान और दाखिल ख़ारिज का काम होता है, और उसका मुखिया तहसीलदार होता है। ब्लॉक विकास की इकाई है, जहाँ से योजनाएँ चलती हैं, और उसका मुखिया खंड विकास अधिकारी होता है।

कई राज्यों में दोनों की सीमाएँ एक जैसी हैं, इसलिए लोग उन्हें एक ही मान लेते हैं। पर कुछ जगह एक तहसील में दो ब्लॉक आते हैं, या उल्टा। ज़मीन का काम हो तो तहसील देखिए, योजना का काम हो तो ब्लॉक।

नरेगा और आवास जैसी योजनाओं में ब्लॉक और पंचायत चुननी होती है, तहसील नहीं। यही वजह है कि नरेगा जॉब कार्ड की सूची में तहसील का विकल्प मिलता ही नहीं।

सूची में क्या-क्या मिलता है

गाँवों की सूची सिर्फ़ नामों की फ़ेहरिस्त नहीं होती। हर गाँव के आगे उसकी कुल आबादी, पुरुष और महिला की गिनती, क्षेत्रफल और पिन कोड दर्ज रहता है, और नाम पर जाने से पूरा ब्यौरा खुल जाता है।

इसी ब्यौरे में साक्षरता दर, लिंगानुपात और अनुसूचित जाति तथा जनजाति की आबादी भी रहती है। ये सब जनगणना 2011 के आँकड़े हैं, यानी हर गाँव के लिए एक ही तरीक़े से इकट्ठे किए गए, इसलिए दो गाँवों की तुलना भरोसे से की जा सकती है।

सूची किस काम आती है

सबसे आम काम ज़मीन का है। रिकॉर्ड निकालते समय पोर्टल गाँव का नाम माँगता है, और वह नाम वही होना चाहिए जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, बोलचाल वाला नहीं। सूची से सही वर्तनी मिल जाती है।

दूसरा काम पहचान का है। एक ही नाम के गाँव पास-पास होते हैं, और सूची में तहसील के साथ देखने पर पक्का हो जाता है कि आपका गाँव कौन सा है। तीसरा काम तुलना का है, जब यह देखना हो कि अपने गाँव की आबादी या साक्षरता आस-पास के गाँवों के मुक़ाबले कहाँ ठहरती है।

गाँवों की संख्या और आकार का रिश्ता

जिन राज्यों में तहसीलें ज़्यादा हैं, वहाँ हर तहसील छोटी होती है और उसके नीचे कम गाँव आते हैं। जहाँ तहसीलें कम हैं, वहाँ एक तहसील के नीचे सैकड़ों गाँव तक हो सकते हैं, और सूची कई पन्नों में फैल जाती है।

यह सिर्फ़ सुविधा की बात नहीं है। बड़ी तहसील का मतलब है कि तहसील कार्यालय दूर पड़ता है और वहाँ भीड़ ज़्यादा रहती है, जिसका असर ज़मीन के काम की रफ़्तार पर पड़ता है।

नाम की वर्तनी सबसे बड़ी अड़चन है

सरकारी रिकॉर्ड में नाम अंग्रेज़ी में लिखे गए और फिर वापस हिंदी में पढ़े गए, इसलिए कई गाँवों के नाम दो-तीन तरह से मिलते हैं। रामपुर और रामपुरा, नयागाँव और नया गाँव, ये अलग प्रविष्टियाँ बन जाती हैं।

ढूँढ़ते समय पूरा नाम टाइप करने के बजाय शुरू के तीन-चार अक्षर डालिए और सूची में से चुनिए। इससे वर्तनी की गड़बड़ी से बचा जा सकता है, और यही तरीक़ा सरकारी पोर्टलों पर भी काम करता है।

पंचायत की सूची अलग होती है

गाँवों की सूची और ग्राम पंचायतों की सूची एक नहीं हैं। एक पंचायत के नीचे अक्सर दो से पाँच गाँव आते हैं, इसलिए पंचायतों की संख्या हमेशा कम रहती है। पंचायत का नाम आमतौर पर उसके सबसे बड़े गाँव पर रखा जाता है।

इसी वजह से योजनाओं के पोर्टल पर अपने गाँव का नाम न मिलने पर घबराना नहीं चाहिए। संभव है वह किसी और नाम वाली पंचायत के नीचे दर्ज हो, और ग्राम पंचायत का मतलब समझ लेने से यह उलझन कम हो जाती है।

सूची से गाँव की तुलना कैसे करें

एक ही तहसील के गाँवों की तुलना सबसे काम की होती है, क्योंकि उनकी भौगोलिक स्थिति और खेती का ढंग लगभग एक जैसा रहता है। ऐसे में आबादी या साक्षरता का फ़र्क़ सचमुच किसी बात का संकेत होता है, न कि सिर्फ़ इलाक़े के अंतर का।

तुलना करते समय तीन चीज़ें साथ देखिए: कुल आबादी, क्षेत्रफल और साक्षरता दर। इन तीनों को मिलाकर पढ़ने से पता चलता है कि गाँव कितना बसा हुआ है और वहाँ की स्थिति आस-पास के मुक़ाबले कैसी है।

तहसील बदलती भी है

राज्य समय-समय पर नई तहसीलें बनाते हैं, ख़ासकर जब कोई तहसील इतनी बड़ी हो जाए कि लोगों को कार्यालय बहुत दूर पड़ने लगे। नई तहसील बनने पर कुछ गाँव पुरानी तहसील से निकलकर नई में चले जाते हैं।

इसका असर काग़ज़ों पर पड़ता है। पुराने दस्तावेज़ में तहसील का नाम कुछ और लिखा होगा और नए में कुछ और, जबकि गाँव वही है। ज़मीन के मामलों में यह अंतर अक्सर सामने आता है, इसलिए पुराने काग़ज़ देखते समय उस समय की तहसील का नाम ध्यान में रखना पड़ता है।

अंत में एक व्यावहारिक बात। सूची खोलते समय अपने गाँव का नाम याद रखने के साथ-साथ पड़ोस के दो-तीन गाँवों के नाम भी याद रखिए। जब वर्तनी की वजह से अपना गाँव न मिले, तब पड़ोसी गाँव ढूँढ़कर उसी तहसील की सूची में नीचे-ऊपर देखने से अपना गाँव मिल जाता है। यह तरीक़ा सरकारी पोर्टलों पर भी उतना ही काम करता है जितना यहाँ।

FAQs

तहसील राजस्व की इकाई है, जहाँ ज़मीन का रिकॉर्ड और दाखिल ख़ारिज का काम होता है। ब्लॉक विकास की इकाई है, जहाँ से योजनाएँ चलती हैं। कई जगह दोनों की सीमा एक जैसी है, पर हर जगह नहीं।

हर गाँव की कुल आबादी, पुरुष और महिला की गिनती, क्षेत्रफल और पिन कोड। नाम पर जाने से साक्षरता दर और लिंगानुपात जैसा पूरा ब्यौरा खुल जाता है।

तीन वजहें हो सकती हैं: वह किसी और तहसील में दर्ज है, उसकी वर्तनी अलग लिखी है, या वह एक बस्ती है और अलग राजस्व गाँव नहीं। तीसरी वजह सबसे आम है।

नहीं। एक पंचायत के नीचे कई गाँव आते हैं, इसलिए पंचायतों की संख्या हमेशा कम रहती है। योजनाओं के पोर्टल पंचायत माँगते हैं, गाँव नहीं।