e-KYC का मतलब है आधार से यह पक्का करना कि कार्ड पर दर्ज हर सदस्य सचमुच मौजूद है। पहले यह काग़ज़ पर होता था, अब उँगली के निशान या आँख की पुतली से होता है, और इसीलिए इसे electronic KYC कहा जाता है।
इसकी ज़रूरत इसलिए पड़ी कि कार्डों पर ऐसे नाम दर्ज थे जो कहीं और जा चुके थे या रहे ही नहीं। हर सदस्य की पहचान मशीन से जाँचने पर वह सूची अपने आप साफ़ होती जाती है।
किसकी e-KYC ज़रूरी है
कार्ड पर दर्ज हर सदस्य की, सिर्फ़ मुखिया की नहीं। यह वह जगह है जहाँ सबसे ज़्यादा लोग चूक जाते हैं: मुखिया दुकान पर जाकर अपनी e-KYC करा आता है और मान लेता है कि पूरा परिवार हो गया।
बच्चों के लिए नियम राज्य के हिसाब से बदलते हैं, क्योंकि छोटी उम्र में उँगली के निशान स्थिर नहीं होते। कई राज्यों में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों को छूट है और उनकी प्रविष्टि माता या पिता के साथ जुड़ जाती है।

कहाँ करा सकते हैं
सबसे आसान रास्ता अपनी उचित मूल्य दुकान है। वहाँ लगी e-PoS मशीन में यही सुविधा होती है और दुकानदार को इसके लिए अलग से शुल्क लेने का हक़ नहीं है।
दुकान पर न हो सके तो नज़दीकी CSC या जन सेवा केंद्र पर हो जाता है। कुछ राज्यों ने मोबाइल app से घर बैठे चेहरे की पहचान वाली सुविधा भी शुरू की है, पर वह हर राज्य में नहीं है।
न कराने पर क्या रुकता है
पहला असर यह होता है कि जिस सदस्य की e-KYC नहीं हुई, उसका हिस्सा रुक जाता है। पूरा कार्ड बंद नहीं होता, पर हर महीने मिलने वाली मात्रा उतनी ही कम हो जाती है जितने सदस्य अधूरे हैं।

लंबे समय तक अधूरा रहने पर नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, क्योंकि रिकॉर्ड में वह सदस्य असत्यापित माना जाता है। इसीलिए समय सीमा की ख़बरों पर ध्यान देना चाहिए, जो हर राज्य अलग से जारी करता है।
आधार में जानकारी पुरानी हो तो
e-KYC तभी सफल होती है जब आधार की जानकारी मौजूदा हो। अगर आधार दस साल से अपडेट नहीं हुआ, या उँगली के निशान काम की वजह से घिस गए हैं, तो मशीन पहचान नहीं पाती।
ऐसे में पहले आधार केंद्र पर जाकर biometric अपडेट कराना पड़ता है, उसके बाद e-KYC होती है। बुज़ुर्गों और मज़दूरी करने वालों में यह दिक़्क़त सबसे आम है, और उनके लिए आँख की पुतली वाला विकल्प अक्सर काम कर जाता है।
e-KYC और आधार सीडिंग एक नहीं हैं
आधार सीडिंग का मतलब है कार्ड के साथ आधार संख्या दर्ज कर देना। e-KYC का मतलब है उस संख्या को मशीन से सत्यापित कर देना। पहला काग़ज़ी है, दूसरा जीवित पहचान माँगता है।
कई लोगों का आधार कार्ड से जुड़ा होता है पर e-KYC बाक़ी रहती है, और वे मान लेते हैं कि काम पूरा है। पोर्टल पर दोनों की स्थिति अलग-अलग दिखती है, इसलिए दोनों जाँचिए।
One Nation One Ration Card से रिश्ता
देश में कहीं भी राशन लेने की सुविधा पूरी तरह इसी पहचान पर टिकी है। दूसरे राज्य में दुकान पर आपकी पहचान मशीन से ही होगी, इसलिए e-KYC अधूरी हो तो वहाँ राशन नहीं मिलेगा।
मज़दूरी के लिए बाहर जाने वाले परिवारों के लिए यह सबसे काम की बात है। जाने से पहले पूरे परिवार की e-KYC करा लेना बाद की भागदौड़ से बचा देता है, और राज्यवार नियम राशन कार्ड वाले हिस्से में दिए गए हैं।
स्थिति कैसे जाँचें
हर राज्य के खाद्य पोर्टल पर कार्ड संख्या डालकर सदस्यवार स्थिति दिखती है, जहाँ हर नाम के आगे लिखा रहता है कि उसकी e-KYC हुई या नहीं। यही सूची दुकान की मशीन पर भी दिखती है।
अगर पोर्टल पर हुई दिख रही है और दुकान पर नहीं, तो मामला मशीन के डेटा के देर से अपडेट होने का है और कुछ दिन में ठीक हो जाता है। महीनों तक अंतर बना रहे तो आपूर्ति कार्यालय में लिखित शिकायत दीजिए।
नाम जोड़ने की पूरी प्रक्रिया अलग है और उसे राशन कार्ड में नाम कैसे जोड़ें वाली पोस्ट में विस्तार से लिखा है। नया नाम जुड़ने के बाद उसकी e-KYC अलग से करानी होती है।
दुकानदार शुल्क माँगे तो
e-KYC मुफ़्त है। उचित मूल्य दुकान पर लगी मशीन इसी काम के लिए है और दुकानदार को इसके बदले पैसे लेने का कोई अधिकार नहीं। फिर भी यह शिकायत बहुत आम है।
पैसे माँगे जाएँ तो ब्लॉक या तहसील के आपूर्ति कार्यालय में लिखित शिकायत दीजिए, और राज्य की खाद्य helpline पर भी दर्ज कराइए। दुकानदार का लाइसेंस इसी विभाग से मिलता है, इसलिए शिकायत का असर होता है।
परिवार का कोई सदस्य बाहर रहता हो
यह सबसे आम अड़चन है। काम के लिए दूसरे राज्य में गया सदस्य अपनी e-KYC घर की दुकान पर नहीं करा सकता, क्योंकि उसे ख़ुद मशीन पर उँगली रखनी होती है।
कई राज्यों ने इसके लिए मोबाइल app से चेहरे की पहचान वाली सुविधा दी है, जिससे यह कहीं से भी हो जाता है। जहाँ वह न हो, वहाँ सदस्य जिस राज्य में है वहीं की किसी दुकान या CSC से करा सकता है, क्योंकि पहचान केंद्रीय रिकॉर्ड से मिलाई जाती है।
e-KYC और राशन की मात्रा का हिसाब
मात्रा उन्हीं सदस्यों की गिनी जाती है जिनकी पहचान पूरी है। पाँच लोगों के कार्ड पर तीन की e-KYC हुई हो, तो अनाज तीन का ही मिलेगा।
यह बात पर्ची पर साफ़ दिखती है, इसलिए हर बार राशन लेते समय पर्ची ज़रूर लीजिए। उस पर सदस्यों की संख्या और मात्रा दोनों लिखी रहती है, और वहीं से पता चल जाता है कि किसी की पहचान बाक़ी है।
पहचान बार-बार असफल हो तो
उँगली के निशान घिस जाना मज़दूरी करने वालों और बुज़ुर्गों में आम है। ऐसे में पहले आँख की पुतली वाला विकल्प आज़माइए, जो ज़्यादातर मशीनों में होता है और अक्सर काम कर जाता है।
वह भी न चले तो आधार केंद्र पर biometric अपडेट कराना पड़ता है। यह आधार का काम है, राशन कार्ड का नहीं, इसलिए इसे आपूर्ति कार्यालय नहीं कर सकता, और यही बात बताई नहीं जाती इसलिए लोग महीनों दुकान के चक्कर लगाते रहते हैं।
नाम जुड़ा पर e-KYC बाक़ी
नया सदस्य जोड़ने के बाद उसकी e-KYC अपने आप नहीं हो जाती। ये दो अलग काम हैं और दूसरा पहले के बाद करना पड़ता है।
यही वजह है कि नाम जुड़ने के बाद भी कई परिवारों की मात्रा नहीं बढ़ती और वे समझते हैं कि आवेदन मंज़ूर नहीं हुआ। पोर्टल पर सदस्यवार स्थिति देख लेने से यह उलझन तुरंत सुलझ जाती है।
अपने गाँव की दुकान कौन सी है
हर गाँव एक तय उचित मूल्य दुकान से जुड़ा होता है और e-KYC वहीं सबसे आसानी से होती है। दुकान का नाम और दुकानदार का नाम पोर्टल पर पंचायत चुनने के बाद दिख जाता है।
अपने गाँव की तहसील और ज़िला पक्का करना हो तो राज्यों की सूची से नीचे उतरा जा सकता है, और एक ही नाम के दो गाँव होने पर यही तरीक़ा सही वाला पहचानने में काम आता है।
कितनी बार करानी पड़ती है
यह एक बार का काम है, दोहराना नहीं पड़ता। एक बार पहचान दर्ज हो जाने पर वह रिकॉर्ड में बनी रहती है और हर महीने राशन लेते समय दोबारा नहीं करानी होती।
दुकान पर हर बार जो उँगली रखवाई जाती है, वह e-KYC नहीं है। वह उस महीने का लेन-देन दर्ज करने के लिए है, यानी यह प्रमाण कि राशन सचमुच आपको मिला। दोनों अलग चीज़ें हैं और अक्सर एक समझ ली जाती हैं।
हाँ, नया सदस्य जुड़ने पर उसकी e-KYC अलग से करानी होगी, और आधार में biometric अपडेट कराने के बाद भी एक बार दोबारा करानी पड़ सकती है, क्योंकि रिकॉर्ड में नया नमूना दर्ज हो चुका होता है।
FAQs
आधार से यह पक्का करना कि कार्ड पर दर्ज हर सदस्य सचमुच मौजूद है। पहचान उँगली के निशान या आँख की पुतली से मशीन पर की जाती है, इसीलिए इसे electronic KYC कहते हैं।
नहीं। कार्ड पर दर्ज हर सदस्य की अलग से करानी होती है। यही वह जगह है जहाँ सबसे ज़्यादा लोग चूकते हैं, क्योंकि मुखिया अपनी करा आता है और मान लेता है कि पूरा परिवार हो गया।
जिस सदस्य की e-KYC नहीं हुई, उसके हिस्से का अनाज रुक जाता है। पूरा कार्ड बंद नहीं होता, पर हर महीने मिलने वाली मात्रा उतनी ही कम हो जाती है।
नहीं, यह मुफ़्त है। उचित मूल्य दुकान की मशीन इसी काम के लिए है और दुकानदार को शुल्क लेने का अधिकार नहीं। पैसे माँगे जाएँ तो आपूर्ति कार्यालय या राज्य की खाद्य helpline पर शिकायत कीजिए।