पश्चिम बंगाल में ज़मीन का रिकॉर्ड खतियान कहलाता है और वह मौज़ा के हिसाब से रखा जाता है। मौज़ा राजस्व की सबसे छोटी इकाई है, गाँव जैसी, और हर मौज़ा का अपना एक नंबर होता है जिसे JL संख्या कहते हैं।
राज्य का पोर्टल इसी ढाँचे पर चलता है, इसलिए वहाँ पहुँचने से पहले अपना मौज़ा जान लेना ज़रूरी है। यह पन्ना पूरा रास्ता बताता है, और वह फ़र्क़ भी समझाता है जो यहाँ सबसे ज़्यादा उलझन पैदा करता है: RS और LR खतियान। हमारे रिकॉर्ड में पश्चिम बंगाल के 19 ज़िले, 341 ब्लॉक और 40,390 गाँव दर्ज हैं।

पोर्टल कौन सा है
राज्य का land record पोर्टल banglarbhumi.gov.in है, जिसे भूमि एवं भूमि सुधार विभाग चलाता है। देखने के पैसे नहीं लगते, पर कुछ विकल्पों के लिए पोर्टल पर खाता बनाना पड़ता है।
घर पर "Know your property" यानी अपनी संपत्ति जानिए वाला विकल्प सबसे काम का है। वहीं से खतियान और प्लॉट, दोनों की जानकारी मिलती है। बाक़ी विकल्प म्यूटेशन आवेदन, शुल्क भुगतान और आवेदन की स्थिति देखने के लिए हैं।
ज़िला, ब्लॉक, मौज़ा
ज़िला और ब्लॉक चुनने के बाद मौज़ा की सूची खुलती है। सूची लंबी होती है, इसलिए JL संख्या पता हो तो सीधे वही चुन लीजिए; मौज़ा के नाम आपस में मिलते-जुलते होते हैं और ग़लत चुनना आसान है।
अपना गाँव किस ब्लॉक में आता है यह पक्का कर लेने से खोज आसान हो जाती है। यह पश्चिम बंगाल के ज़िले खोलकर देखा जा सकता है, जहाँ हर ब्लॉक के गाँव जनसंख्या के साथ दर्ज हैं।
RS और LR खतियान का फ़र्क़
पश्चिम बंगाल में दो तरह के खतियान चलते हैं और यही सबसे बड़ी उलझन है। RS खतियान पुराने सर्वे का है और LR खतियान बाद के सर्वे का, जो आज का रिकॉर्ड माना जाता है।
दोनों में प्लॉट संख्या अलग हो सकती है, यानी एक ही ज़मीन का RS प्लॉट नंबर कुछ और होगा और LR प्लॉट नंबर कुछ और। पुराने काग़ज़ पर लिखा नंबर पोर्टल पर न मिले तो अक्सर यही कारण होता है, और दोनों का मिलान ब्लॉक भूमि कार्यालय में मौजूद रहता है।

खतियान संख्या से और प्लॉट संख्या से
मौज़ा चुनने के बाद दो तरह से खोजा जा सकता है। खतियान संख्या से खोजने पर उस खाते की पूरी ज़मीन दिखती है, यानी एक मालिक के नाम दर्ज सारे प्लॉट।
प्लॉट संख्या से खोजने पर उस एक टुकड़े का ब्यौरा आता है और यह भी कि उस पर किसका नाम दर्ज है। कौन सा रास्ता चुनना है, यह इस पर निर्भर करता है कि आपके पास कौन सी संख्या पहले से है।
खतियान शब्द बिहार और झारखंड में भी चलता है, पर वहाँ मौजूदा रिकॉर्ड अलग नाम से रखा जाता है। बिहार वाली व्यवस्था बिहार भूमि वाली पोस्ट में समझाई है।
खतियान में क्या लिखा रहता है
खतियान में मालिक का नाम, पिता का नाम, खतियान संख्या और उसके नीचे आने वाले प्लॉट आते हैं। हर प्लॉट के सामने उसका क्षेत्रफल और ज़मीन की श्रेणी दर्ज रहती है।
क्षेत्रफल यहाँ डेसिमल और एकड़ में लिखा मिलता है, और कहीं-कहीं कट्ठा में भी। श्रेणी वाली पंक्ति बताती है कि ज़मीन खेती की है, बस्तुओ यानी घर बनाने की है, या तालाब जैसी किसी और क़िस्म की, और इसी से तय होता है कि उस पर क्या किया जा सकता है।
ज़मीन की श्रेणी बदलवाना अलग काम है
खेती की ज़मीन पर सीधे घर नहीं बनाया जा सकता। उसके लिए श्रेणी बदलवानी पड़ती है, जिसका आवेदन अलग से दिया जाता है और उसमें समय लगता है।
ख़रीदने से पहले श्रेणी देख लेना इसीलिए ज़रूरी है। लोग अक्सर ज़मीन ख़रीदने के बाद यह पता करते हैं, और तब तक पैसा लग चुका होता है।
म्यूटेशन यानी नाम चढ़वाना
रजिस्ट्री होने से खतियान में नाम अपने आप नहीं बदलता। ख़रीद या विरासत के बाद म्यूटेशन का आवेदन अलग से देना पड़ता है, और पश्चिम बंगाल में वह इसी पोर्टल से दिया जा सकता है।
आवेदन के बाद ब्लॉक भूमि कार्यालय जाँच करता है और सुनवाई की तारीख़ दी जाती है। पूरी प्रक्रिया, काग़ज़ और समय-सीमा दाखिल ख़ारिज क्या है वाली पोस्ट में दी है।
ख़ाजना यानी भूमि कर
ज़मीन पर हर साल जो कर लगता है उसे ख़ाजना कहते हैं, और वह भी इसी पोर्टल से जमा किया जा सकता है। रसीद ऑनलाइन निकल आती है।
रसीद संभालकर रखिए। यह सबसे आसानी से मिलने वाला काग़ज़ है जो दिखाता है कि रिकॉर्ड में आपका नाम चल रहा है, और कई आवेदनों में इसी की माँग होती है।
नक़्शा अलग विकल्प में है
खतियान यह नहीं बताता कि प्लॉट मौज़ा में कहाँ पड़ता है। उसके लिए नक़्शा देखना पड़ता है, जो पोर्टल पर अलग विकल्प के रूप में है और मौज़ा के हिसाब से खुलता है।
नक़्शा और खतियान मिलाकर देखना ख़रीदते समय सबसे ज़रूरी क़दम है, ख़ासकर वहाँ जहाँ RS और LR के प्लॉट नंबर अलग हैं। काग़ज़ पर क्षेत्रफल सही होने के बावजूद टुकड़ा दूसरी जगह निकल सकता है।
ग़लती दिखे तो
नाम की वर्तनी, पिता का नाम या क्षेत्रफल ग़लत दर्ज हो तो सुधार का आवेदन ब्लॉक भूमि एवं भूमि सुधार कार्यालय में दिया जाता है। साथ में वह काग़ज़ लगाइए जिसमें सही जानकारी है।
जहाँ किसी और का दावा भी उसी ज़मीन पर हो, वहाँ मामला सीधा सुधार नहीं रह जाता। दोनों का फ़र्क़ ज़मीन के काग़ज़ में नाम ग़लत हो तो वाली पोस्ट में समझाया है।
ऑनलाइन नक़ल कहाँ चलती है
पोर्टल से खुलने वाली साधारण नक़ल देखने के लिए है। किसी सरकारी आवेदन, बैंक या अदालत में वही प्रति चलती है जिस पर विभाग की मुहर हो।
इसलिए काम के हिसाब से तय कीजिए कि कौन सी चाहिए। सिर्फ़ जानकारी के लिए मुफ़्त नक़ल काफ़ी है, और काग़ज़ जमा करने के लिए प्रमाणित प्रति निकलवानी पड़ती है।
बर्गादार का नाम अलग दर्ज होता है
पश्चिम बंगाल के खतियान में एक ख़ाना उस व्यक्ति के लिए भी है जो ज़मीन जोतता है पर मालिक नहीं है। ऐसे काश्तकार को बर्गादार कहा जाता है और उसका नाम रिकॉर्ड में दर्ज रहता है।
यह ख़ाना ख़रीदते समय ज़रूर पढ़िए। बर्गादार दर्ज होने पर ज़मीन पर उसका क़ानूनी हक़ बनता है, और उस हक़ को अनदेखा करके किया गया सौदा बाद में उलझता है। मालिक और जोतने वाला अलग-अलग हो सकते हैं, और रिकॉर्ड यही फ़र्क़ दिखाता है।
एक मौज़ा और एक गाँव हमेशा एक नहीं होते
मौज़ा राजस्व की इकाई है और बस्ती बोलचाल की। कई बार एक ही मौज़ा में दो-तीन बस्तियाँ आती हैं, जिनके अपने नाम चलते हैं पर रिकॉर्ड में वे अलग दर्ज नहीं होतीं।
इसीलिए सूची में अपनी बस्ती का नाम न मिलने का मतलब यह नहीं कि रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में बड़े मौज़ा का नाम ढूँढ़िए, आपकी ज़मीन उसी के भीतर दर्ज मिलेगी।
मोबाइल पर देखते समय
पोर्टल मोबाइल पर खुल जाता है, पर खतियान तालिका के रूप में आता है और छोटी स्क्रीन पर दाईं ओर से कट जाता है। क्षेत्रफल और श्रेणी वाले ख़ाने अक्सर उसी हिस्से में रहते हैं।
फ़ाइल डाउनलोड करके देखना सबसे आसान हल है। ख़ाजना जमा करने की आख़िरी तारीख़ के आसपास पोर्टल धीमा चलता है, इसलिए वह काम पहले निपटा लेना बेहतर है।
आवेदन की स्थिति देखते रहिए
म्यूटेशन या सुधार का आवेदन देने के बाद उसकी स्थिति पोर्टल पर आवेदन संख्या से देखी जा सकती है। वहीं यह भी दिखता है कि फ़ाइल किस स्तर पर है।
सुनवाई की तारीख़ पर न पहुँचने से आवेदन ख़ारिज हो जाता है, और फिर सब दोबारा करना पड़ता है। इसलिए आवेदन संख्या संभालकर रखिए और महीने में एक बार स्थिति देख लीजिए।
याद रखने लायक़ बातें
मौज़ा और JL संख्या, ये दो चीज़ें पश्चिम बंगाल में सबसे ज़्यादा काम आती हैं। RS और LR का फ़र्क़ समझ लेने पर आधी उलझन ख़त्म हो जाती है।
साल में एक बार अपना खतियान और ख़ाजना की स्थिति देख लेना अच्छी आदत है। राज्य के पोर्टल और नियमों का ब्यौरा पश्चिम बंगाल के ज़मीन रिकॉर्ड वाले पन्ने पर है।
FAQs
RS खतियान पुराने सर्वे का है और LR खतियान बाद के सर्वे का, जो आज का रिकॉर्ड माना जाता है। दोनों में प्लॉट संख्या अलग हो सकती है, इसलिए पुराने काग़ज़ का नंबर पोर्टल पर न मिलना आम बात है।
मौज़ा राजस्व की सबसे छोटी इकाई है, गाँव जैसी, और हर मौज़ा का अपना नंबर होता है जिसे JL संख्या कहते हैं। पोर्टल पर मौज़ा इसी संख्या से चुनना सबसे भरोसेमंद रहता है।
बर्गादार वह काश्तकार है जो ज़मीन जोतता है पर मालिक नहीं है, और रिकॉर्ड में उसका नाम अलग दर्ज रहता है। ख़रीदने से पहले यह ख़ाना ज़रूर पढ़िए, क्योंकि उससे ज़मीन पर उसका क़ानूनी हक़ जुड़ा होता है।
सीधे नहीं। उसके लिए ज़मीन की श्रेणी बदलवानी पड़ती है, जिसका आवेदन अलग से दिया जाता है और उसमें समय लगता है। ख़रीदने से पहले श्रेणी देख लेना इसीलिए ज़रूरी है।