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जम्मू कश्मीर पीएम आवास ग्रामीण: सूची, किस्त और स्थिति

जम्मू कश्मीर में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का रिकॉर्ड केंद्र सरकार के आवास पोर्टल पर रखा जाता है। नीचे दिए link से वह पन्ना खुलता है जहाँ राज्य, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनकर अपने गाँव की सूची देखी जा सकती है, बिना कोई संख्या याद रखे।

जम्मू कश्मीर में क्या अलग है

जम्मू कश्मीर में गाँव के स्तर की पंचायत हल्क़ा पंचायत कहलाती है, इसलिए रिकॉर्ड में पता हल्क़े के नाम से दर्ज रहता है। यह पहाड़ी क्षेत्र है, इसलिए सहायता की राशि मैदानी दर से ज़्यादा तय होती है। पोर्टल पर हर राज्य का अपना code होता है। जम्मू कश्मीर का code 14 है, इसलिए पन्ने पर राज्य चुनते समय वही code दिखे तभी आप सही राज्य की सूची देख रहे हैं।

आधिकारिक पोर्टल

यह link सीधे सरकारी पोर्टल पर ले जाता है। हम कोई आवेदन नहीं लेते और न ही OTP, Aadhaar संख्या या बैंक विवरण माँगते हैं।

कैसे देखें: पूरा तरीक़ा

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    पहले सूची खोलिए, खोज नहीं

    पोर्टल पर Search Beneficiary वाला पन्ना पंजीकरण संख्या माँगता है, जो ज़्यादातर लोगों के पास होती ही नहीं। इसलिए ऊपर दिया link सीधे उस पन्ने पर ले जाता है जहाँ गाँव चुनकर पूरी सूची देखी जा सकती है।

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    राज्य, ज़िला, ब्लॉक और पंचायत चुनिए

    चारों एक के बाद एक चुनने होते हैं। ब्लॉक की सूची ज़िला चुनने के बाद खुलती है और पंचायत की सूची ब्लॉक चुनने के बाद।

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    अपने गाँव की सूची में नाम देखिए

    सूची में नाम के साथ पंजीकरण संख्या भी रहती है। वही संख्या आगे हर काम में लगेगी, इसलिए उसे लिख लीजिए या फ़ोटो खींच लीजिए।

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    पंजीकरण संख्या से अपना ब्यौरा खोलिए

    संख्या मिल जाने के बाद Search Beneficiary वाले पन्ने से घर की मौजूदा स्थिति, स्वीकृत राशि और अब तक आई किस्तें देखी जा सकती हैं।

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    भुगतान की स्थिति अलग से जाँचिए

    किस्त खाते में गई या नहीं, यह FTO वाले पन्ने पर दिखता है। वहाँ पैसा भेजे जाने और बैंक तक पहुँचने की तारीख़ें अलग अलग दर्ज रहती हैं।

ज़रूरी दस्तावेज़

Jammu and Kashmir: पीएम आवास ग्रामीण / PMAY-G के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
दस्तावेज़ किसलिए
आधार कार्ड परिवार के मुखिया का, और सहमति पत्र जिससे आधार का इस्तेमाल किया जा सके
बैंक पासबुक किस्त इसी खाते में आती है, इसलिए खाता चालू और आधार से जुड़ा होना चाहिए
जॉब कार्ड मकान बनाते समय मज़दूरी के दिन नरेगा से जुड़ते हैं, इसलिए संख्या माँगी जाती है
ज़मीन का काग़ज़ घर उसी ज़मीन पर बनेगा जिस पर परिवार का अधिकार दर्ज हो, इसलिए पट्टा या अभिलेख की नक़ल
मोबाइल नंबर हर किस्त की सूचना इसी नंबर पर आती है

कुछ ग़लत दिखे तो क्या करें

सूची में नाम नहीं मिल रहा

पहले पंचायत सही चुनी है या नहीं यह देखिए, क्योंकि मिलते जुलते नाम की पंचायतें एक ही ब्लॉक में होती हैं। सही पंचायत में भी नाम न हो तो परिवार सर्वे में दर्ज नहीं हुआ है, और यह पंचायत या ब्लॉक कार्यालय में ही ठीक होता है।

नाम सूची में है पर पैसा नहीं आया

किस्त काम की प्रगति देखकर आती है, एक साथ नहीं। हर चरण की जियो टैग फ़ोटो चढ़ने के बाद ही अगली किस्त बनती है। फ़ोटो चढ़ चुकी है और पैसा नहीं आया तो खाता और आधार के जुड़ाव की जाँच कराइए।

पहली किस्त आई और आगे रुक गई

यह सबसे आम शिकायत है और वजह लगभग हमेशा यही होती है कि अगले चरण की फ़ोटो पोर्टल पर नहीं चढ़ी। आवास मित्र या पंचायत सचिव से मिलकर यह पहले जँचवाइए।

खाता बदलना है

खाता बदलने का काम ब्लॉक कार्यालय से होता है। नई पासबुक की नक़ल और आधार के साथ लिखित प्रार्थना दीजिए। बदलाव दर्ज होने तक अगली किस्त रुकी रहती है।

ज़मीन अपने नाम नहीं है

योजना का घर उसी ज़मीन पर बनता है जिस पर परिवार का अधिकार दर्ज हो। ज़मीन पिता या दादा के नाम है तो पहले वारिस के रूप में नाम चढ़वाना पड़ता है, वरना स्वीकृति अटकी रहती है।

Jammu and Kashmir के बारे में

जनगणना 2011 के अनुसार Jammu and Kashmir में 20 ज़िले थे और कुल जनसंख्या 12,541,302 दर्ज हुई थी। हमारे पास इस राज्य के 23 ज़िलों और 6,649 गाँवों का ब्यौरा दर्ज है। पोर्टल पर ज़िला, ब्लॉक और पंचायत चुननी होती है, जो राजस्व तहसील से अलग हो सकती है। अपने गाँव का ब्यौरा देखने के लिए Jammu and Kashmir के ज़िलों की सूची खोलिए, फिर तहसील और गाँव चुनिए।

Jammu and Kashmir के ज़िले

पोर्टल पर सबसे पहले ज़िला चुनना पड़ता है। Jammu and Kashmir के ज़िले नीचे दिए हैं। किसी भी ज़िले पर click करके उसकी तहसीलें और गाँव देखे जा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ऊपर दिया पहला link खोलिए, फिर राज्य, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनिए। उस पंचायत के सभी नाम और उनकी पंजीकरण संख्या एक साथ खुल जाएँगी।

मैदानी इलाक़ों में सहायता की राशि एक दर से तय होती है और पहाड़ी, पूर्वोत्तर तथा कठिन क्षेत्रों में उससे ज़्यादा। इसके अलावा शौचालय के लिए अलग राशि और मकान बनाते समय नरेगा से मज़दूरी के दिन जुड़ते हैं। अपने घर के लिए स्वीकृत राशि पंजीकरण संख्या वाले ब्यौरे में लिखी रहती है।

किस्तों में। हर किस्त निर्माण के एक चरण से बँधी है, और उस चरण की जियो टैग फ़ोटो पोर्टल पर चढ़ने के बाद ही अगली किस्त बनती है।

नाम सर्वे से आता है और ग्राम सभा उसकी पुष्टि करती है। सर्वे में परिवार छूट गया हो तो पंचायत में लिखित आवेदन देकर अगले सर्वे में नाम जुड़वाना पड़ता है।

योजना में कम से कम पच्चीस वर्ग मीटर का घर तय है, जिसमें रसोई के लिए अलग साफ़ जगह शामिल है। इससे बड़ा बनाना हो तो अपना ख़र्च जोड़ा जा सकता है।

पहले आवास मित्र और पंचायत सचिव से मिलिए, क्योंकि रुकावट अक्सर फ़ोटो न चढ़ने की होती है। हल न मिले तो ब्लॉक विकास अधिकारी और उसके बाद ज़िला ग्रामीण विकास अभिकरण में शिकायत दर्ज होती है।

Disclaimer: यह कोई सरकारी website नहीं है। यहाँ दी गई जानकारी सिर्फ़ मार्गदर्शन के लिए है और हर link संबंधित सरकारी पोर्टल पर जाता है। हम OTP, Aadhaar संख्या या बैंक विवरण collect नहीं करते।

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