वोटर कार्ड सिर्फ़ वोट के लिए नहीं चलता। वह पहचान और पते का प्रमाण भी है, इसलिए उसमें दर्ज नाम और पता ग़लत हो तो बाक़ी कामों में भी अड़चन आती है। सुधार का काम एक ही फ़ॉर्म से होता है और ऑनलाइन हो जाता है।
यह पन्ना बताता है कि कौन सा सुधार किस तरह होता है, और गाँव या शहर बदलने पर क्या करना पड़ता है।

एक ही फ़ॉर्म, कई काम
पहले हर काम के लिए अलग फ़ॉर्म थे। अब सुधार, पता बदलना, कार्ड दोबारा मँगाना और दिव्यांग के रूप में दर्ज होना, ये सब एक ही फ़ॉर्म 8 से होते हैं। फ़ॉर्म भरते समय आपको चुनना पड़ता है कि किस श्रेणी में आवेदन है।
नया नाम जोड़ने के लिए फ़ॉर्म 6 है, और किसी का नाम हटवाने के लिए फ़ॉर्म 7। मरने के बाद नाम हटवाना भी इसी सातवें फ़ॉर्म से होता है।
सुधार का तरीक़ा
- मतदाता सेवा पोर्टल पर मोबाइल नंबर से खाता बनाइए और लॉगिन कीजिए।
- फ़ॉर्म 8 चुनिए और अपना EPIC नंबर डालिए, जो कार्ड पर ऊपर लिखा रहता है।
- जो हिस्सा ग़लत है उसे चुनिए और सही जानकारी भरिए।
- प्रमाण की कॉपी लगाइए और जमा कीजिए। संदर्भ संख्या मिल जाएगी।
प्रमाण वही चलता है जो उस ग़लती से मेल खाए। जन्मतिथि के लिए जन्म प्रमाण पत्र या दसवीं की अंकतालिका, पते के लिए बिजली का बिल, बैंक पासबुक या राशन कार्ड।
गाँव या शहर बदलने पर
पता उसी विधानसभा क्षेत्र में बदला हो, तो फ़ॉर्म 8 में पता बदलने वाला विकल्प चुनिए। दूसरे विधानसभा क्षेत्र या दूसरे राज्य में गए हों, तो नए पते पर फ़ॉर्म 6 भरा जाता है, और पुराना नाम वहीं से हट जाता है।
यहाँ गाँव का नाम वही लिखिए जो सरकारी रिकॉर्ड में है, वरना बूथ ग़लत जुड़ जाता है। सरकारी फ़ॉर्म में गाँव, तहसील और पिन कोड सही भरने की पूरी बात फ़ॉर्म भरने वाले पन्ने पर है।

नाम कट जाए तो
हर कुछ समय में सूची का पुनरीक्षण होता है और उसमें दोहरे या पुराने नाम हटाए जाते हैं। इसमें कभी कभी चलता हुआ नाम भी कट जाता है। ऐसा हो तो फ़ॉर्म 6 से दोबारा आवेदन दीजिए और साथ में पुराना कार्ड लगाइए।
सूची में अपना नाम देखने के लिए पोर्टल पर खोज की सुविधा रहती है, जहाँ नाम और ज़िले से या EPIC नंबर से नाम मिल जाता है। पते में पिन कोड ग़लत न जाए, इसके लिए गाँव का पिन कोड पहले देख लीजिए।
कितना समय लगता है
आवेदन बूथ स्तर के अधिकारी के पास जाता है, जो घर आकर या फ़ोन पर पुष्टि करता है। इसके बाद निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी मंज़ूरी देता है। आम तौर पर कुछ हफ़्तों में काम हो जाता है, और स्थिति संदर्भ संख्या से पोर्टल पर दिखती रहती है।
बाक़ी वोटर संबंधी काम और आधिकारिक लिंक एक जगह वोटर आईडी वाले हिस्से में दिए हैं।
ध्यान रखने लायक़ बातें
- सुधार का कोई शुल्क नहीं लगता।
- एक ही समय में दो जगह नाम रखना क़ानूनन ग़लत है।
- अठारह साल पूरे होने से पहले भी अग्रिम आवेदन दिया जा सकता है।
- संदर्भ संख्या सँभालकर रखिए, स्थिति उसी से दिखती है।
FAQs
फ़ॉर्म 8। इसी से नाम, पता, जन्मतिथि का सुधार, कार्ड दोबारा मँगाना और दिव्यांग के रूप में दर्ज होना, सब होता है।
वहाँ फ़ॉर्म 6 से नया आवेदन देना पड़ता है। पुराने पते से नाम अपने आप हट जाता है।
फ़ॉर्म 6 से दोबारा आवेदन दीजिए और साथ में पुराना कार्ड लगाइए।
आम तौर पर कुछ हफ़्ते। बूथ स्तर का अधिकारी पुष्टि करता है, फिर निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी मंज़ूरी देता है।