योजना का पैसा खाते में न आए, तो वजह अक्सर योजना में नहीं होती। वजह यह होती है कि खाता आधार से जुड़ा नहीं है, या जुड़ा तो है पर उस खाते से नहीं जिसकी उम्मीद थी। सरकार का पैसा आधार नंबर के पीछे चलता है, खाता नंबर के पीछे नहीं।

इसी को आधार सीडिंग कहते हैं, और यह पन्ना बताता है कि यह कैसे जाँची जाती है और कैसे बदली जाती है।

आधार से बैंक खाता कैसे जोड़ें, और DBT चालू है या नहीं कैसे देखें

सीडिंग और लिंकिंग एक चीज़ नहीं है

बैंक में आधार की कॉपी जमा करना लिंकिंग है, यानी बैंक के रिकॉर्ड में आपका आधार नंबर दर्ज हो गया। सीडिंग इससे आगे की बात है। इसमें आपका आधार नंबर NPCI की उस सूची में दर्ज होता है जो बताती है कि इस आधार का पैसा किस खाते में भेजा जाए।

यही वजह है कि आधार की कॉपी जमा करने के बाद भी पैसा दूसरे खाते में चला जाता है। कॉपी बैंक के पास है, पर NPCI की सूची में कोई पुराना खाता दर्ज है।

चालू है या नहीं, यह कैसे देखें

तीन तरीक़े हैं और तीनों मुफ़्त हैं।

  1. myAadhaar पोर्टल पर लॉगिन करके bank seeding status वाला हिस्सा खोलिए। वहाँ बैंक का नाम और आख़िरी तारीख़ दिखती है।
  2. बैंक की पासबुक अपडेट कराइए या शाखा में पूछिए कि खाता DBT के लिए सक्रिय है या नहीं।
  3. जिस योजना का पैसा आना है, उसके पोर्टल पर अपनी स्थिति देखिए। वहाँ अक्सर साफ़ लिखा रहता है कि आधार सीडिंग बाक़ी है।

स्थिति में बैंक का नाम दिखे पर वह खाता बंद हो चुका हो, तो पैसा वापस लौटता रहेगा और हर बार आपको लगेगा कि किस्त आई ही नहीं।

जोड़ने या बदलने का तरीक़ा

यह काम उसी बैंक में होता है जिसमें आप पैसा चाहते हैं। शाखा में सीडिंग या DBT फ़ॉर्म भरिए, आधार की कॉपी लगाइए और रसीद लीजिए। कई बैंक यही काम नेट बैंकिंग, ATM या मोबाइल ऐप से भी करा देते हैं।

बदलना भी इसी तरह होता है। नए बैंक में फ़ॉर्म देने पर आधार वहाँ जुड़ जाता है और पुराना अपने आप हट जाता है, क्योंकि एक आधार के पीछे एक ही खाता सक्रिय रह सकता है। पुराने बैंक से हटवाने की अलग दौड़ ज़रूरी नहीं होती।

आधार से बैंक खाता कैसे जोड़ें, और DBT चालू है या नहीं कैसे देखें

दो खाते होने पर क्या होता है

गाँव में यह आम है। एक खाता मनरेगा के समय खुला था, दूसरा जन धन में, तीसरा किसी सहकारी बैंक में। पैसा उसी में जाएगा जो NPCI की सूची में आख़िरी बार दर्ज हुआ, बाक़ी में नहीं। इसीलिए यह देख लेना ज़रूरी है कि सक्रिय खाता वही हो जिसे आप चलाते हैं।

जॉब कार्ड में दर्ज खाता ग़लत हो तो पैसा मज़दूरी का भी अटकता है, और उसका सुधार अलग से कराना पड़ता है। वह तरीक़ा जॉब कार्ड में सुधार वाले पन्ने पर है।

कितना समय लगता है

बैंक का काम उसी दिन हो जाता है, पर NPCI की सूची में दर्ज होने में कुछ दिन लगते हैं। जब तक सूची अपडेट नहीं होती, तब तक पैसा पुराने रास्ते पर ही जाता रहेगा। इसलिए किसी किस्त की तारीख़ पास हो तो सीडिंग पहले करा लीजिए।

किन योजनाओं का पैसा इसी रास्ते आता है

पीएम किसान की किस्त, मनरेगा की मज़दूरी, गैस सब्सिडी, छात्रवृत्ति, पेंशन और फ़सल बीमा का भुगतान, सब आधार से जुड़े खाते में जाते हैं। इनमें से किसी की भी स्थिति देखनी हो तो पीएम किसान वाले हिस्से से शुरू कीजिए, वहाँ राज्यवार पोर्टल दिए हैं।

ध्यान रखने लायक़ बातें

  • सीडिंग का कोई शुल्क नहीं है। किसी बिचौलिए को पैसा देने की ज़रूरत नहीं।
  • खाता आपके अपने नाम का होना चाहिए। किसी और के खाते में योजना का पैसा नहीं आता।
  • संयुक्त खाते में पहला नाम आपका हो तो ही सीडिंग काम करती है।
  • रसीद सँभालकर रखिए, पैसा न आने पर शिकायत में वही काम आती है।

FAQs

बैंक में आधार की कॉपी जमा करना लिंकिंग है। सीडिंग में आपका आधार नंबर NPCI की उस सूची में दर्ज होता है जो तय करती है कि पैसा किस खाते में भेजा जाए।

उसी में जो सूची में आख़िरी बार दर्ज हुआ है। एक आधार के पीछे एक ही खाता सक्रिय रहता है, बाक़ी अपने आप हट जाते हैं।

बैंक का काम उसी दिन हो जाता है, पर सूची में दर्ज होने में कुछ दिन लगते हैं। तब तक पैसा पुराने रास्ते पर ही जाता है।

नहीं। यह मुफ़्त है और बैंक शाखा, नेट बैंकिंग या ऐप, कहीं से भी कराया जा सकता है।