पीएम किसान की किस्त साल में तीन बार आती है, और जिस गाँव में दस लोगों को मिलती है वहाँ दो या तीन के खाते में नहीं आती। ऐसा किसी एक वजह से नहीं होता, पर वजहें गिनी चुनी हैं और सब पोर्टल पर ही दिख जाती हैं।

यह पन्ना पहले स्थिति देखने का तरीक़ा देता है, फिर हर वजह का हल।

पीएम किसान की किस्त क्यों रुकी, और स्टेटस कैसे देखें

स्थिति देखने का तरीक़ा

पोर्टल पर beneficiary status वाला हिस्सा खोलिए और आधार नंबर या पंजीकरण नंबर डालिए। नाम, गाँव और अब तक की हर किस्त की तारीख़ सामने आ जाती है। जिस किस्त पर रुकावट है, उसके आगे वजह लिखी रहती है।

पंजीकरण नंबर याद न हो तो उसी पन्ने पर मोबाइल नंबर से खोजने का विकल्प रहता है। दोनों में से कुछ भी काम करे, स्थिति वही दिखती है।

किस्त रुकने की पाँच आम वजहें

eKYC बाक़ी है। यह सबसे आम वजह है। eKYC मोबाइल OTP से पोर्टल पर हो जाती है, और उँगली के निशान वाली eKYC नज़दीकी केंद्र पर होती है। जब तक यह पूरी नहीं होती, किस्त रुकी रहती है।

ज़मीन का ब्यौरा दर्ज नहीं है। योजना में ज़मीन का रिकॉर्ड जोड़ना ज़रूरी है। नाम रिकॉर्ड में न चढ़ा हो, या खाता संख्या ग़लत दर्ज हो, तो भुगतान रुक जाता है। रिकॉर्ड में नाम चढ़वाने की प्रक्रिया दाखिल ख़ारिज वाले पन्ने पर दी है।

आधार और खाते का नाम अलग है। एक जगह पूरा नाम और दूसरी जगह छोटा नाम दर्ज हो तो भुगतान लौट आता है। ज़मीन के काग़ज़ में नाम की ग़लती हो तो उसका सुधार अलग से होता है, और वह तरीक़ा रिकॉर्ड सुधार वाले पन्ने पर है।

खाता आधार से नहीं जुड़ा। पैसा आधार से जुड़े खाते में ही जाता है। जाँचने और जुड़वाने का तरीक़ा इसी साइट पर अलग पन्ने पर है।

पात्रता पर सवाल है। आयकर देने वाले, सरकारी पेंशन पाने वाले और कुछ श्रेणियाँ योजना से बाहर हैं। सत्यापन में ऐसा कुछ मिले तो नाम रोक दिया जाता है।

पीएम किसान की किस्त क्यों रुकी, और स्टेटस कैसे देखें

सुधार कहाँ होता है

नाम, लिंग और बैंक की छोटी ग़लतियाँ पोर्टल पर ख़ुद ठीक की जा सकती हैं। ज़मीन के ब्यौरे और पात्रता से जुड़ी बातें गाँव के स्तर पर सुधरती हैं, यानी पटवारी, लेखपाल या कृषि विभाग के कर्मचारी के पास। ज़िले में नोडल अधिकारी भी तय रहता है और उसका नंबर पोर्टल पर दिया रहता है।

राज्य के अपने पोर्टल और नियम अलग होते हैं, और उनका ब्यौरा पीएम किसान वाले हिस्से में राज्यवार दिया गया है।

पैसा वापस माँगे जाने पर

कुछ राज्यों में अपात्र पाए गए लोगों से किस्तें वापस माँगी गई हैं। नोटिस मिले तो पहले स्थिति पन्ने पर देखिए कि आपत्ति किस आधार पर है। अगर ज़मीन का रिकॉर्ड ग़लत जुड़ गया था, तो सुधार के बाद मामला बंद हो जाता है।

ध्यान रखने लायक़ बातें

  • किस्त की कोई फ़ीस नहीं है। पैसा दिलाने के नाम पर माँगी गई रक़म ठगी है।
  • eKYC साल में एक बार माँगी जा सकती है, इसलिए किस्त से पहले देख लीजिए।
  • एक परिवार में एक ही व्यक्ति को किस्त मिलती है, पति और पत्नी दोनों को नहीं।
  • स्थिति में तारीख़ दिखे पर पैसा न आए तो बैंक की पासबुक ज़रूर जाँचिए।

FAQs

eKYC का बाक़ी रहना। यह मोबाइल OTP से पोर्टल पर या उँगली के निशान से नज़दीकी केंद्र पर पूरी होती है।

आधार नंबर से भी स्थिति दिखती है, और उसी पन्ने पर मोबाइल नंबर से खोजने का विकल्प रहता है।

गाँव के स्तर पर, यानी पटवारी, लेखपाल या कृषि विभाग के कर्मचारी के पास। ज़िले में नोडल अधिकारी भी तय रहता है।

नहीं। एक परिवार में एक ही व्यक्ति को किस्त मिलती है।